खबर हिमांचल प्रदेश के जिला ऊना में धान की कटाई के बाद खेतों को खाली छोड़ने के बजाय अगली फसल की बुनाई के लिए जुताई व सिंचाई पर खर्च करने के परंपरा व्यवस्था अब बदली नजर आ रही है। किसान धान की कटाई के तुरंत बाद खेत में मौजूद नमी का उपयोग कर आलू की बुवाई कर रहे हैं।
मिट्टी के बजाय पराली से ढककर उत्पादन कर रहे हैं। आलू की यह नई खेती करने की तकनीक किसानों को कम लागत में दूसरी फसल लेने का अच्छा विकल्प है।
कृषि अनुसंधान उपकेंद्र अखरोट की ओर से इस विधि को किसानों के खेतों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। और नंदपुर में रंजना देवी के खेत में बिना जुताई किए पुराल विधि से आलू की बुवाई सफलतापूर्वक की गई है।
इस तकनीक की खासियत है कि धान की कटाई के बाद ही खेत की जुताई करने की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि खेत में पहले से मौजूद अवशिष्ट नमी का इस्तेमाल कर आलू की बुवाई कर दी जाती है। इसके लिए धान के बचे हुए पराली को मल्च के रूप में खेत में इस्तेमाल किया जाता है और धान के अवशेषों का भी सदुपयोग अच्छी तरह से होता है।
रंजना देवी ने बताया कि बिना जुताई किए आलू का उत्पादन कृषि अनुसंधान उपकेंद्र अखरोट से शून्य जुताई विधि से आलू का प्रशिक्षण लिया है। साथ ही अनुसंधान केंद्र के रिसर्च फर्म का दौरा कर इस तकनीक की जानकारी ली।
इसके बाद इस वर्ष उन्होंने अपने खेत में इसे अपनाया भी है। वह अन्य किसानों के खेतों में भी इस विधि से आलू की बुवाई करवा रही हैं ताकि दूसरे किसान भी इस नई तकनीक से जुड़ सकें।

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